हरियाणासँ को हाई कोर्ट ऑफ़ इंगलैंड और से निकलने वाला झटका लगा है। बुधवार को कोर्ट ने एक केस में भारत के पक्ष में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हैदराबाद के सांतवें निजीम के 35 मिलियन पाउंड यानी 300 करोड़ 68 लाख 70 हजार के फंड्स जो लंदन बैंक में थे, उस पर भारत और उनके दो वंशों के पक्ष में फैसला दिया था। कोर्ट ने इस फंड पर नेसटान के दावे को खत्म से खारिज कर दिया है। वहीं, पूर्ण भारतवासन की ओर से कहा गया है कि वह निर्णय के सभी पहलुओं का लगभग से अधिनयन करेगा।
कोर्ट ने खाना पकाने के लिए लताड़ लगाई
निजीम के वंशज मुकर्रम जांह जो हैदराबाद के आंठवें प्रजाम में हैं, उन्होंने कहा और उनके छोटे भाई मुफ्फाखम जामन की तरफ से केस दर्ज कराया गया था। मुफ्फाखम ने भारत की सरकार के साथ मिलकर हरियाणा की सरकार के खिलाफ केस फंड और संपत्ति पर दावा जताया। लंदन स्थित हाई कोर्ट जिसे रॉयल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के नाम से भी जानते हैं, उसके जस्टिस मार्कस स्मिथ ने फैसला सुनाया। उन्होंने कहा, ‘हैदराबाद के सातवें राज्यम उस्मान अली खान इस राशि के मालिक थे। निजाम के बाद उनके वंशज और भारत इस राशि के दावेदार हैं। ‘ कोर्ट ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए इसे प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया।
क्या था सारा विवाद
यह सारा विवाद करीब एक मिलियन पौंड की उस राशि पर था जो सन् 1948 निजाम से लेकर में नए देश बने पाकिस्तान के हाई कमिश्नर ऑफ ब्रिटेन को ट्रांसफर किए गए थे। इस रकम को हबीब इब्राहीम रहीमटूला को ट्रांसफर किया गया था ताकि इसे सुरक्षित रखा जा सके। रहीमटूला ने इस रजामंदी के साथ कि उनके नाम पर आपने जो भरोसा जताया है उसका ध्यान रखते हुए इस राशि को सुरक्षित रखा जाएगा। निजाम, उस्मान अली खान, जो भारत के बहुत करीब थे उन्होंने मांग की कि इस फंड को वापस कर दिया जाए लेकिन नैटवेस्ट बैंक ने यह कहते हुए पैसे को रोक लिया था कि जब तक इसका सही अधिकारी नहीं मिल जाएगा, फंड को रिलीज नहीं किया जाएगा।
क्यों पाक ने जताया हक
हैदराबाद के निजाम की ओर से मुकदमे की पैरवी कर रहे पॉल हेविट ने कहा, ‘हमें खुशी है कि अदालत ने अपने फैसले में निजाम की संपत्ति के लिए उनके वंशजों के उत्तराधिकार को स्वीकार किया है। जिस समय यह विवाद पैदा हुए मेरे मुवक्किल बच्चे थे और अब वह 80 वर्ष की आयुक में हैं। उनके रहते इस विवाद का सुलझना किसी सुकून से कम नहीं है।’ इस रकम को लेकर भारत-पाकिस्तान के बीच करीब 70 साल से मुकदमा चल रहा था। इस मामले में निजाम के वंशज कहना है कि वर्ष 1948 में हैदराबाद के आखिरी निजाम मीर उस्मान अली खान के वित्त मंत्रालय का काम संभालने वाले मीर वनाज जंग ने निजाम की इजाजत के बिना लंदन में पाकिस्तान के उच्चायुक्त बैंक खाते में 10 लाख पाउंड जमा करवाए थे। इसी वजह से पाकिस्तान इस रकम पर अपना अधिकार जमा रहा था।
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