महापर्व हिंदू आने में अब कुछ ही दिन बचें हैं, वही हिंदू धर्म में दिवाली को सबसे बड़ा पर्व माना जाता हैं वही दिवाली का यह पर्व धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज तक मनाया जाता हैं वही इस बार दीवाली 27 अक्टूबर को पड़ रही हैं दिवाली का त्योहार घर में सुख समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता हैं वही धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रभु श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद रावण का वध करके अयोध्या वापस लौटे थे।

इसी की खुशी में दिवाली का पर्व मनाया जाता हैं। वही दिवाली के दिन हर घर में लक्ष्मी गणेश की पूजा की जाती हैं वही ऐसा माना जाता हैं कि इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं जिनके स्वागत के लिए हर कोई अपने घर को रोशनी से सजाता हैं। वही लक्ष्मी पूजा के समय पूजा की थाली में खील और बताशे अवश्य ही रखा जाता हैं मगर क्या आपको यह पता हैं कि महालक्ष्मी की पूजा खील बताशे से ही क्यों की जाती हैं अगर आप नहीं जानते हैं तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।
बता दें कि खील धान से बनते हैं जो चावल का ही एक रूप माना जाता हैं जिसका मतलब यह होता हैं कि खील चावल से बनती हैं दिवाली आने से कुछ समय पहले यही फसल तैयार होती हैं महालक्ष्मी को इस फसल के पहले भोग के रूप में खील बताशे चढ़ाए जाते हैं।
महालक्ष्मी की पूजा खील बताशे से करने के पीछे जयोतिष कारण यह भी हैं कि दिवाली का पर्व धन और वैभव का प्रतीक माना जाता हैं हिंदू धर्म में धन और वैभव का देवता शुक्र ग्रह को माना गया हैं सफेद और मीठी चीजें शुक्र का प्रतीक मानी जाती हैं अगर किसी मनुष्य का शुक्र कमजोर हैं तो महालक्ष्मी को प्रसन्न करके भी शुक्र को अपने अनुरुप कर सकता हैं।
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