Tuesday, October 22, 2019

हैप्पी बर्थडे चंद्रयान -1: इसरो का पहला मिशन जिसने दुनिया को बताया चांद पर पानी है

आज ही के दिन चंद्रायन -1 को भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन – इसरो) ने चांद के लिए प्रस्थान किया था। यानी 22 अक्टूबर 2008 को। पूरे 11 साल हो गए हैं लेकिन चंद्रयान -1 की वजह से आज भी देश का नाम अभि से लिया जाता है। क्योंकि यह देश का पहला ऐसा अंतरिक्ष मिशन था, जिसने दुनिया को यह बताया कि चांद की सतह पर पानी है। यह पूरी सदी की सबसे बड़ी खोज थी। इस मिशन ने पूरी दुनिया को इसरो की धाक जमाई। जो देश चांद पर आदमी उतार चुका था, वह भी हैरान था कि भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने इतनी बड़ी खोज कैसे की? आइए जानते हैं कि चंद्रयान -1 का आइडिया कहां से आया है? किसने बनाया? इस मिशन से क्या हासिल हुआ? क्या सफलता मिली? कितना जटिल इस मिशन को पूरा करना है? .IA जानते हैं ISRO की शान चंद्रयान -1 की पूरी कहानी 20 साल पहले चंद्रयान -1 को बनाने का आइडिया आज से 11 साल पहले 22 अक्टूबर 2008 को चंद्रयान लॉन्च किया गया था। लेकिन इसे बनाने का आइडिया 1999 में भारतीय एकेडमी ऑफ साइंसेज (IAS) में आया था।

इसके बाद 2000 में एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने इसे सहमति प्रदान की। फिर इसरो नेशनल लूनर मिशन टास्क फोर्स बनाया गया, जिसमें देश के कई बड़े वैज्ञानिक शामिल थे। वर्ष 2003 के नवंबर महीने में पहले मून मिशन चंद्रयान -1 को भारत सरकार की तरफ से हरी झंडी मिली। 5 साल की मेहनत के बाद तैयार हुआ था चंद्रयान -1 सरकार की हरी झंडी मिलने के बाद इसरो के विभिन्न सेंटर्स के वैज्ञानिक इस मिशन में गए।

इसके लिए कई तरह के रिमोट सेंसिंग उपकरण बनाए गए हैं। साथ ही पहली बार डीपी स्पेस नेटवर्क (DSN) की जरूरत महसूस हुई, क्योंकि पहली बार भारत का कोई मिशन अंतरिक्ष में इतना दूर जा रहा था। तब तक बड़े-बड़े एंटीने वाले डीएपी स्पेस नेटवर्क बनाए गए ताकि सुदूर अंतरिक्ष में संपर्क स्थापित किया जा सके। इन सबको पूरा करने में लगभग 5 साल लग गए।

लॉन्च के लिए चुना गया सबसे भरोसेमंद डिजाइन पीएसएलवी था। भरोसेमंद प्रतीकों PSLV-C11 से लॉन्च हुआ चंद्रयान -1 चंद्रयान -1 की लॉन्चिंग से पहले PSLV क्रिस्टल ने 15 साल में 12 सफल लॉन्चिंग की थी। इसलिए सबसे भरोसेमंद पिक्सल को चुना गया। 2008 के मध्य में PSLV ने एकसाथ 29 उपग्रहों को लॉन्च किया था।

उस समय यह बहुत बड़ी बात थी। इसीलिए, इस पैनल को चुना गया। लेकिन इसमें थोड़ा बदलाव किया गया। इसलिए चंद्रयान -1 के वजन को उन्होंने उठाया। इस तस्वीर को लंबे और बड़े स्ट्रैप पर लागू किया गया है।

22 अक्टूबर 2008 को PSLV-C11 चैनल से चंद्रयान -1 को चांद की यात्रा के लिए लॉन्च किया गया। चंद्रयान -1 चांद के चारों ओर 3400 से ज्यादा चक्कर लगाया चंद्रयान -1 ने 22 अक्टूबर को लॉन्च होने के बाद अंतरिक्ष में 7 चक्कर लगाते हुए 8 नवंबर को चांद की पहली कक्षा में पहुंचा। चार बार चांद की कक्षा बदलने के बाद 12 नवंबर को चंद्रायन -1 चांद के सबसे करीब पहुंच गए। यानी चांद की सतह से 100 किलोमीटर ऊपर।

जहां उसे चांद के चारों ओर चक्कर लगाना था। चंद्रयान -1 ने लगभग 11 महीने काम किया। ज्यादा रेडिएशन की वजह से चंद्रयान -1 में पावर सप्लाई बाधित हो गई और इसमें लगे कंप्यूटरों ने काम करना बंद कर दिया था। जिसकी वजह से इसके पृथ्वी के डीपी अंतरिक्ष नेटवर्क से संपर्क टूट गया था।

चंद्रयान -1 को 2 साल काम करना था। लेकिन इस तरह 11 महीने ही काम किया। इस दौरान उन्होंने चांद के चारों ओर 3400 से ज्यादा चक्कर लगाए। 2 जुलाई 2016 को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के ग्राउंड राडार सिस्टम ने एक बार फिर चंद्रयान -1 को खोज निकाला।

वह लगभग उसी कक्षा में चांद के चारों ओर चक्कर लगा रहा था। चंद्रयान -1 मिशन से देश को, इसरो को क्या मिला?

चंद्रयान -1 ने बताया कि चांद की सतह पर पानी मौजूद है।
3400 चक्कर लगाने के दौरान चंद्रयान -1 ने लगभग 70 हजार थ्री-डी फोटो पृथ्वी पर भेजीं। उसने चांद के 70 प्रतिशत हिस्से की तस्वीरें पृथ्वी पर भेजी थीं। यह उस समय एक रिकॉर्ड था।
टेरेन मैपिंग कैमरा से पहली बार चांद की चोटियों और गड्ढों की तस्वीरें ली गईं।
पहली बार चांद की सतह पर सौर तूफान के प्रभावों का अध्ययन किया गया।
२५ मार्च २०० ९ 1 चंद्रयान -1 ने पृथ्वी की तस्वीर खींची भी थी।

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