Monday, October 21, 2019

पहाड़ों, झरनों के बीच से गुजरते हुए ऊटी पहुंचती है ये ट्रेन, 114 साल पुराना है ये रेल रूट

दक्षिण भारत का एक बेहतरीन टूरिस्ट स्पॉट है ऊटी। तमिलनाडु के इस हिल स्टेशन की खूबसूरती देखने दूर-दूर से लोग आते हैं। ये शहर ब्रिटिश शासन में बसाया गया था और तभी से ये उतना ही चर्चित है। नीलगिरी पर्वत श्रंखला पर बसा ये हिल स्टेशन साल भर बहुत ही सुहाने मौसम वाला रहता है। यहां चाय और कॉफी के बागान भी हैं। साल भर यहां टूरिस्ट रहते हैं और अगर आपको भी यहां जाने का मन है तो यहां की एक सबसे बड़ी खासियत है ऊटी की रेलवे लाइन। इसे कुछ फिल्मों में भी दिखाया गया है। जैसे वरुण धवन की फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ में ये रेल रूट दिखाया गया है।

क्या है खासियत-

ये ट्रेन रूट ब्रिटिश काल में बनाया गया था और ये तबसे ऐसे ही चल रहा है। ये रेल मार्ग 16 सुरंगों से होकर गुजरता है। मेट्टुपालयम से ऊटी के बीच ये टॉय ट्रेन चलती है। इसमें 258 पुल हैं जो पहाड़ों और घाटियों के बीच से होकर गुजरती हैं। यही नहीं यहां कई चाय के बागान और झरने भी देखने को मिलेंगे।

ये है वर्ल्ड हैरिटेज साइट-

इस ट्रेन रूट को 14 साल पहले यूनेस्को ने विश्व हैरिटेज साइट घोषित कर दिया था। इसके साथ शिमला-काल्का ट्रेन रूट और साथ ही साथ दार्जीलिंग हिमालयन रेलवे को भी वर्ल्ड हैरिटेज साइट घोषित किया गया था।

कितनी लंबी है ट्रेन यात्रा-

ये यात्रा 46 किलोमीटर लंबी है और एक छोटी सी सिल्ली की ट्रेन 325 मीटर से लेकर 2,240 मीटर तक की ऊंचाई पर चलती है। रैक और पिनियन सिस्टम रेलवे ट्रैक वाली ये एकलौती भारतीय रेल है।

दुनिया का सबसे पुराने इंजन में से एक-

इस ट्रेन में स्विस एक्स-क्लास का कोयले वाला इंजन इस्तेमाल किया जाता है। ये इंजन दुनिया के सबसे पुराने रेलवे इंजन में से एक है और इसके कारण आपको इस ट्रेन रूट में बैठने का बहुत अलग अनुभव होगा। ये रेल मार्ग 1908 में बनकर तैयार हुआ था और इसका आखिरी स्टॉप कुन्नूर तक था जिसे उठकर ऊटी तक कर दिया गया था।] इसमें 13 रेलवे स्टेशन हैं जिनमें मेट्टुपालयम, कल्लार, अडरले, हिलग्रोव, रन्नमेडे, कटेरी, कुन्नूर, वेलिंगटन, अरावंकडू, केटी, लवडेल, फर्नहिल और ऊटी शामिल हैं।

कब चलती है ये ट्रेन?

ये ट्रेन सुबह 7.10 बजे हर सुबह मेट्टुपालयम स्टेशन से निकलती है और ये कुन्नूर स्टेशन पर अपना इंजन बदलता है। यहां से ऊटी पहुंचते-पहुंचते दोपहर हो जाती है। ऊटी से ये ट्रेन दोपहर 2 बजे निकलती है और शाम 5 बजे तक अपने स्टेशन में पहुंचती है। इसमें फर्स्ट क्लास और सेकंड क्लास कंपार्टमेंट होते हैं और इसका किराया 100 रुपए से 1100 रुपए के बीच होता है। ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन सी सीट बुक करवाई है और कौन सी ट्रेन है यानी अगर हॉलीडे स्पेशल है तो उन फर्स्ट क्लास की सुविधा होगी और आपका किराया 1100 तक पहुंच सकता है।

ऊटी घूमने के वैसे तो कई तरीके हैं, लेकिन टॉय ट्रेन में बैठने का आनंद कुछ और ही है। ये सिर्फ ऊटी शहर को ही नहीं बल्कि ये आस-पास की पहाड़ियों की खूबसूरती को भी दिखाता है। सबसे खास ये है कि इस ट्रेन ट्रैक में जो ब्रिज और सुरंग हैं वो भी अंग्रेजों के जमाने के ही हैं। अगर आप ऊटी घूमने का प्लान बना रही हैं तो इस ट्रेन रूट को मत भूलिएगा।

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source https://indiaabhiabhi.com/this-train-reaches-ooty-passing-through-mountains-waterfalls-this-railroad-is-114-years-old/

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