अमेरिका की एक शीर्ष अधिकारी ने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान कहा कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं काम कर रही हैं। इनमें सर्वोच्च न्यायालय भी शामिल है जो सरकार की ओर से जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के फैसले की समीक्षा कर रहा है। दक्षिण और मध्य एशिया क्षेत्र की सहायक अमेरिकी विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने यह जवाब कांग्रेस सदस्य इल्हान उमर के सवाल पर दिया जिसमें उन्होंने पूछा था कि क्या अमेरिका अपना भविष्य तय करने के मामले में कश्मीरी लोगों का समर्थन देने को लेकर प्रतिबद्ध है?
‘बहुत ही विविधता वाले देश में पीएम मोदी ने पाया है बहुमत’
वेल्स ने कहा कि वह सोमालिया मूल की अमेरिकी सांसद के इस राय से सहमत नहीं हैं कि अमेरिकी प्रशासन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के संबंध मूल्यों पर आधारित नहीं है। वह, ” मैं हाइलाइट करना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री लगातार दूसरी बार जीत कर सत्ता में आए हैं। उन्होंने बहुत ही विविधता के लिए देश में बहुमत पाने में सफल हुए हैं। ’’ वेल्स ने कहा, विविधता बता आपको पृष्ठभूमि बता दूं कि इस फैसले को विपक्षी सदस्यों सहित संसद ने मंजूरी दी है। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की समीक्षा कर रहा है। बंदी प्रत्यक्षीकरण के मामले में उच्च न्यायालय की समीक्षा कर रहे हैं। भारत में लोकतांत्रिक संस्थाएं काम कर रही हैं। ”
अमेरिकी सांसदों ने मानवाधिकार के सहायक मंत्री से पूछे जाने वाले प्रश्न
अमेरिकी सहायक मंत्री ने कहा कि अमेरिका का निश्चित तौर पर मानना है कि कश्मीरी लोगों की आवाज सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, ” जब राजनीतिक व्यवस्था बहाल होती है या विधानसभा चुनाव होते हैं तब कश्मीरी अपने मत का प्रदर्शन करने के तरीके से विधानसभा में प्रकट होते हैं। इसलिए मेरा मानना है कि आवाजाही पर पाबंदी को लेकर जो चिंता जताई गई और पिछले 78 दिन में हमने जो कुछ भी देखा है उसे देखकर कश्मीरियों के लिए बेहतर प्रदर्शन का विचार मुश्किल जान पड़ता है। ’’ अमेरिकी सांसदों ने वेल्स और मानवाधिकार के सहायक मंत्री रॉबर्ट डेस्ट्रो से लगातार कश्मीर में कथित पाबंदियों को लेकर सवाल किए गए और पूछा कैसे अमेरिका भारत से संबंधों का इस्तेमाल इन कथित पाबंदियों ने किया ँ को हटवाने में कर सकता है। एक मौके पर डेस्ट्रो सांसदों से इस बात पर सहमत होते दिखे कि कश्मीर में इंसानियत है।
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