मुख्यमंत्री की कुर्सी मिलते ही हिन्दू हृदय सम्राट स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे के बेटे उद्धव ठाकरे सारा हिंदुत्व भूल गए हैं, जी हाँ। किसी समय क्रांतिकारी वीर सावरकर के पोते से मिलने को बेकरार रहने वाले उद्धव ठाकरे अब साइड निकल ले रहे हैं।
दरअसल कांग्रेस सेवादल के शिविर में नाथूराम गोडसे और वीर सावरकर के विवादित संबंधों पर लिखी गई किताब को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है. इस मामले में शिकायत लेकर मंत्रालय पहुंचे सावरकर के पोते को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मिलने का समय नहीं दिया और सीएम बिना मुलाकात के मंत्रालय से निकल गए।
बता दें की कांग्रेस सेवादल के शिविर में बांटी गई विवादित पुस्तक पर सावरकर के पोते रंजीत ने रोक लगाने की मांग की है. इसके अलावा रंजीत सावरकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के वीर सावरकर पर दिए गए बयान से भी नाखुश हैं. इसी मामले में केस दर्ज कराने की मांग को लेकर वह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिलने के लिए मंत्रालय पहुंचे, लेकिन सीएम ने उनको मिलने का वक्त देना उचित नहीं समझा।
उद्धव ठाकरे से मुलाक़ात न होने के बाद सावरकर के पोते ने कहा, एक तरफ शिवसेना सावरकर के गुणगान करती है, जबकि दूसरी तरफ उसी के नेता वीर सावरकर के अपमान पर शिकायत लेने के लिए वक्त तक नहीं दे रहे।
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