झारखंड में नई सरकार बने हुए अभी महीनेभर भी नहीं हुआ है, इससे पहले ही हेमंत सोरेन सरकार में फूट की खबर सामने आ रही है. झारखंड में 29 दिसंबर को हेमंत सरकार ने शपथ लिया था. इस सरकार में झामुमो, कांग्रेस, राजद और झारखंड विकास मोर्चा के 50 विधायकों का समर्थन था. अब इस गठबंधन में टूट की खबर सामने आ रही है.
झाविमो ने हेमंत सरकार से समर्थन वापस ले लिया है. झाविमो ने इस संबंध में विधानसभा अध्यक्ष रविंद्र नाथ महतो को एक लेटर भेजा है. पार्टी अध्यक्ष बाबूलालू मरांडी ने विधानसभा अध्यक्ष को भेजे लेटर में लिखा, “इस वर्ष 4 जनवरी को झाविमो के विधायक दल के नेता पद पर प्रदीप यादव के मनोनयन की सूचना आपको दी थी. परंतु, पार्टी उन्हें तत्काल प्रभाव से विधायक दल के नेता पद से हटा रही है.”
बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि आवश्यक कार्रवाई के लिए आपको यह पत्र प्रेषित किया जा रहा है. झाविमो ने हेमंत सरकार से शुक्रवार को समर्थन वापस लिया. इसके बाद बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी लेटर भेजा. इसमें लिखा गया कि झाविमो बिना शर्त सरकार का समर्थन कर रही थी लेकिन संप्रग में शामिल कांग्रेस पार्टी हमारे विधायकों को तोड़कर अपने दल में शमिल कराने का प्रयास कर रही है.
मरांडी ने लिखा कि इस परिस्थिति में हमारी पार्टी समर्थन के मुद्दे पर पुनर्विचार करते हुए सरकार से समर्थन वापस लेती है. बता दें कि गुरुवार को झाविमो के विधायक दल के नेता प्रदीप यादव और पार्टी से निष्कासित विधायक बंधु टिर्की ने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी. बंधु टिर्की को पार्टी पहले से निष्कासित कर चुकी थी. विधानसभा चुनाव में झाविमो ने तीन सीटें जीती थीं.
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