लोकसभा चुनाव के पांच महीने बाद फिर से चुनावी मौसम वापस आ गया है। इस फैस्टिव सीजन में जहां महाराष्ट्र, हरियाणा के पब्लिक का ध्यान खींचने के लिये बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना, एनसीपी अपने-अपने तरीके से पुरजोर कोशिश करेगी। तो वहीं देश के 64 विधानसभा में भी उपचुनाव होने से हलचल मची रहेगी।
दो राज्यों में विधानसभा चुनाव समेत 64 उपचुनाव होने है
खासकरके अगर उपचुनाव की बात करें तो 15 राज्यों में से यूपी और बिहार के 11 तथा तथा 5 विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव भी होने है। जहां राजनीतिक उठापठक ज्यादा देखने को मिलेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के महाराष्ट्र और हरियाणा में चुनाव की घोषणा के साथ ही सभी राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरु कर दी है। अगले महीने जब दिवाली की धूम रहेगी तो किसी पार्टी का दिवाला भी निकल चुका होगा। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।
पीएम और गृह मंत्री ने दिये चुनावी मुद्दों के संकेत
लेकिन अगर मुद्दों की बात करें तो ऐसा नहीं हैं कि इन राज्यों के पास स्थानीय मुद्दे नहीं है। लेकिन यह तो तय है कि जहां विरोधी दल लोकल मुद्दों के आधार पर बीजेपी सरकार को घेरने की कोशिश करेगी तो एक बार फिर से कश्मीर कार्ड के सहारे नैया पार करने की कोशिश भी देखने को मिलेगी। जिस तरह से गृह मंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने महाराष्ट्र से चुनावी प्रचार की शुरुआत में ही जम्मू और कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर विरोधी दलों के नेताओं पर तीखा प्रहार किया था।
बीजेपी कैंपने शुरु की आक्रामक चुनाव प्रचार
तभी से इस कयास को बल मिलने लगा कि आगामी विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में- महाराष्ट्र हो या हरियाणा, उत्तरप्रदेश हो या बिहार, दक्षिण के राज्य कर्नाटक हो या फिर केरल, हर जगह केंद्र में सत्तारुढ़ बीजेपी सरकार कश्मीर कार्ड पर सवार होकर ही विरोधी दल को नचाएगी तो जनता को भी लुभाएगी। पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ठीक चुनावी बिगुल फूंकने से पहले एनसीपी नेता शरद पवार को घेरने की कोशिश की वहां भी कहीं न कहीं धारा 370 और पाकिस्तान का मुद्दा ही छाया हुआ था।
कांग्रेस एक बार फिर से मुश्किल में
हालांकि बीजेपी का हक बनता है कि जिस तरह से कश्मीर से धारा 370 हटाने का साहस दिखाया उसके लिये पिछले 70 साल में किसी भी केंद्र सरकार ने ठोस पहल भी नहीं की। इसे चुनावी मुद्दा बनाकर लोगों के बीचे वोट मांग सकती है। तो वहीं विपक्षी दल धारा 370 हटाने की प्रक्रिया और देश में छाई मंदी को ठीक तरीके से उठाते हुए जनता के बीच जाएगी, इसमें भी संदेह है। विपक्षी दल कांग्रेस जो महाराष्ट्र और हरियाणा में भी बीजेपी के सामने ताल ठोककर खड़ी तो है, लेकिन जनाधार इस राष्ट्रीय पार्टी का दोनों राज्यों में खिसक चुका है। ऐसे में बीजेपी को स्थानीय मुद्दे से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों तक विपक्षी दलों से कोई चुनौती मिलने के कम ही आसार नजर आते है।
गांधी परिवार पर भी लोगों का हुआ कम भरोसा
कांग्रेस पूरी तरह से अब विपक्ष की भूमिका कम चुनावी रस्म निभाता ही नजर आ रहा है। पार्टी की राष्ट्रीय इकाई से लेकर स्टेट इकाई तक में बिखराव और नेतृत्व का घोर अभाव ही दिखता है। लेकिन एक जीत के लिये बेताब कांग्रेस को अगर इस 2 राज्यों में से 1 भी राज्य में सरकार बनाने का मौका मिल जाता है तो पार्टी का एक बार फिर से आत्मविश्वास लौट सकता है। हालांकि कांग्रेस कैंप से सोनिया गांधी और राहुल गांधी से ज्यादा आक्रामक अगर मोदी सरकार को घेरने की तैयारी में गंभीरता से कोई जुटी है तो वो प्रियंका गांधी ही है। लेकिन उन्होंने अपनी भूमिका उत्तरप्रदेश तक ही सीमित कर ली है।
क्षेत्रिय क्षत्रपों को खुली बागडोर देने से कांग्रेस की सत्ता वापसी संभव
योगी सरकार को चने चबाने के लिये तो प्रियंका मजबूर कर सकती है लेकिन महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस को वापसी करने के लिये अभी-भी जुझारु नेता की जरुरत है। जो बंद कमरे से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत से रुबरु होकर जनता के बीच पार्टी के प्रति भरोसा पैदा कर सके। फिलहाल कांग्रेस के लिये कटु सत्य यही है कि कोई केंद्रीय नेता इस हालात में तो नहीं है कि अपने दम पर पार्टी को इन राज्यों में सत्ता वापसी करा सके। उसके लिये फिर से किसी क्षत्रप पर ही भरोसा करना होगा। उससे भी ज्यादा बागडोर अगर इन राज्यों के नेताओं के हाथ में खुलकर दिया जाए तो कोई कारण नहीं मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे परिणाम कांग्रेस हासिल नहीं कर सकती है। लेकिन अभी दिल्ली दूर है।
The post कश्मीर कार्ड के सहारे ही बीजेपी लड़ेगी आगामी विधानसभा चुनाव! appeared first on indiaabhiabhi.
source https://indiaabhiabhi.com/bjp-will-contest-the-upcoming-assembly-elections-with-the-help-of-kashmir-card/
No comments:
Post a Comment