आज गणेश चतुर्थी है और देशभर में गणेशोत्सव की धूम है। शिवपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था। महाराष्ट्र में यह त्योहार सबसे ज़्यादा धूमधाम से मनाया जाता है जिसका पूरा श्रेय मराठा पेशवाओं को जाता है। कहते हैं जब भारत में पेशवाओं का शासन था, उस समय से इस पर्व को भव्य रूप से मनाया जाने लगा। पेशवा सवाई माधवराव के शासन में पुणे के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था।
जिसके बाद अंग्रेजों के शासन के समय गणेश उत्सव की भव्यता में कमी आने लगी, लेकिन यह परंपरा खत्म नहीं हुई लगातार बनी रही। बता दें कि अंग्रेजों के शासन के दौरान भारतीय संस्कृति पर अंग्रेजी संस्कृति हावी हो रही थी।
नौजवान अपनी सभ्यता और संस्कृति को भूल रहे थे और क्योंकि ईसाई त्योहार भव्यता के साथ मनाए जा रहे थे तो लोगों के मन में अपने धर्म के प्रति नकारात्मकता और अंग्रेजी आचार-विचार के प्रति आकर्षण बढ़ने लगा था। इसे देखते हुए जननेता लोकमान्य तिलक ने सोचा कि हिंदू धर्म को कैसे संगठित किया जाए। लोकमान्य तिलक ने विचार किया कि श्रीगणेश ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो समाज के सभी स्तरों में पूजनीय हैं। वे यह भी जानते थे कि गणेशोत्सव एक धार्मिक उत्सव है और इसमें अंग्रेज शासक दखल नहीं दे सकेंगे।
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