Sunday, November 24, 2019

वास्तव में प्राकृतिक सौंदर्य की देन गोवा, देखे सबसे सुंदर नजारे

घूमना जिसका शौक हो, वह गोवा की सुंदरता के जाल से बच नहीं सकता, ऐसा आकर्षण है इस प्रदेश में, कि दूर दूर से पर्यटक खिंचे चले आते हैं। इसकी वादियां, समुद्री तट, अठखेलियां करती समुद्री लहरें, हरे भरे पेड़, चांदी सी बिखरी रेत और इस पर सोना बिखेरती सूर्य की रश्मियां भला किसे नहीं बुलाती ! आइए चलते हैं गोवा की सुदरता में डूबने उतरने!

गोवा एक नजऱ में:

गोवा की राजधानी व सबसे बड़ा शहर पणजी है। केवल दो जिले हैं उत्तर गोआ व दक्षिण गोआ। राजभाषा कोंकणी है। क्षेत्रफल के हिसाब से गोवा भारत का सबसे छोटा और जनसँख्या में दूसरा सबसे छोटा राज्य है। गोआ का समुद्र तट 121 किलोमीटर लम्बा है। गोआ पहले पुर्तगाल का एक उपनिवेश था। पुर्तगालियों ने यहां लगभग 450 सालों तक शासन किया और दिसंबर 1961 में यह भारतीय गणतंत्र का हिस्सा बना।

गोपराष्ट्र से गोआ तक:

एक जनश्रुति के अनुसार गोआ की रचना भगवान परशुराम ने की थी। कहा जाता है कि परशुराम ने एक यज्ञ के दौरान अपने बाणों की वर्षा से समुद्र को कई स्थानों पर पीछे धकेल दिया था और इसी वजह से आज भी गोआ में बहुत से स्थानों का नाम वाणावली, वाणस्थली इत्यादि है। उत्तरी गोवा में हरमल के पास आज भूरे रंग के एक पर्वत को परशुराम के यज्ञ करने का स्थान माना जाता है।

महाभारत में गोआ का उल्लेख गोपराष्ट्र यानी गाय चरानेवालों के देश के रूप में मिलता है। दक्षिण कोंकण क्षेत्र का उल्लेख गोवाराष्ट्र के रूप में पाया जाता है। संस्कृत के कुछ अन्य पुराने स्रोतों में गोआ को गोपकपुरी और गोपकपट्टन कहा गया है जिनका उल्लेख अन्य ग्रंथों के अलावा हरिवंशम और स्कंद पुराण में मिलता है। गोवा को बाद में कहीं कहीं गोअंचल भी कहा गया है।

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