हर्निया एक बहुत ही आम बीमारी है जो लगभग दो प्रतिशत लोगों में होती है. इसलिए हम सभी के लिए इस स्वास्थ्य समस्या के बारे में जानना जरूरी है. जानकारी के अभाव अथवा गलत जानकारी के कारण कई बार हर्निया के मरीज ठीक समय पर उचित इलाज से वंचित रह जाते हैं व तब यह बीमारी गंभीर हो जाती है, इतनी गंभीर कि जान के लिए भी खतरा पैदा हो जाता है. लेप्रोस्कोपिक सर्जन एवं हर्निया स्पेशलिस्ट डाक्टर विशाल जैन से जानिएहर्निया बिमारी के बारे में
- पेट की मांसपेशियों के किसी हिस्से में कमजोरी आने की वजह से वहां से पेट के अंदर के अंग, सामान्यतः आंतें बाहर आने लगती हैं व वह उस हिस्से में गुब्बारे-सी सूजन बना देती हैं. यह आमतौर पर नाभि के आसपास, जांघ या पेट के जोड़ वाले हिस्से (इनग्वायनल रीजन/ग्राईन) या पेट में पूर्व किए हुए ऑपरेशन के जगह पर होता है. यह प्राय: पुरुषों में अधिक पाया जाता है. यह किसी भी आयु वर्ग में जन्म से लेकर वृद्धावस्था तक होने कि सम्भावना है.
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- पेट के किसी भाग में गुब्बारेनुमा सूजन या फूलन होना. यह सूजन खड़े रहने, खांसने, चलने, भारी सामान उठाने या यूरिन अथवा शौच करने के समय जोर लगाने पर बड़ी हो जाती है.सूजन वाले जगह पर लगातार हल्का दर्द भी होता रहता है.
- यह सूजन लेटने या हाथ से दबाने पर पानी की गुड़-गुड़ जैसी आवाज के साथ अंदर चली जाती है या छोटी हो जाती है.
- बहुत तेज दर्द, उल्टियां होना, पेट फूलना या दस्त नहीं होना इस बात का इशारा होता है कि हर्निया फंस गया या अटक गया है. यह जानलेवा भी साबित होने कि सम्भावना है. ऐसे मरीज को तुरंत चिकित्सक से मिलना चाहिए.
- हर्निया सामान्य दिनचर्या में असुविधा या दर्द उत्पन्न कर सकता है. वजन उठाने या भारी कार्य करने में भी तकलीफ होती है. यहां तक कि संभोग जीवन पर भी प्रभाव पड़ता है. यहां यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि समय के साथ हर्निया में ना तो सुधार होता है व ना ही जाता है, जैसा कि कई बीमारियों में होता है. बल्कि समय के साथ यह बढ़ता ही जाता है व गंभीर रूप धारण कर सकता है. हर्निया में आंतों के फंसने या अटकने की स्थिति में जान का खतरा उत्पन्न होने कि सम्भावना है. इसलिए इसका इलाज तुरंत करवाना चाहिए.
- ऑपरेशन ही इसका एकमात्र स्थाई निवारण है. कोई भी दवाई, जड़ी-बूटी, योग हर्निया को नहीं हटा सकते. बेल्ट बांधना भी उचित उपचार नहीं है व यह कभी-कभी नुकसान भी पहुंचा सकता है. ऑपरेशन में विलंब इसकी जटिलताओं को न्योता देता है जो खतरनाक साबित हैं सकता है. इसलिए जैसे ही इस बीमारी के बारे में मालूम पड़े, वैसे ही यथाशीघ्र योग्य सर्जन को दिखाकर ऑपरेशन करवा लेना चाहिए. यह ऑपरेशन किसी भी आयु वरमें किया जा सकता है, नवजात से लेकर 100 साल के बुजुर्ग तक. ऑपरेशन कई प्रकार से किए जाते हैं जो मरीज की आयु व अन्य कारकों पर निर्भर करता है. जाँच के पश्चात सर्जन ही आपके ऑपरेशन की उचित विधि का सुझाव देंगे.
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- ज्यादा भारी सामान नहीं उठाना चाहिए.
- किसी भी तरह का जोर न लगाएं, जैसे शौच के समय या यूरिन करते समय.
- खांसी हो तो उसका तत्काल उपचार लें, क्योंकि इससेहर्निया पर अलावा दबाव पड़ता है.
- व्यायाम ना करें जिससे कि हर्निया पर दबाव पड़े.
- ज्यादा लंबे समय तक खड़े ना रहें.
- धूम्रपान तुरंत बंद कर दें.
- अतिशीघ्र विशेषज्ञ और योग्य सर्जन से सलाह लेकर ऑपरेशन कराएं.
हर्निया की वजह
- टीबी, अस्थमा इत्यादि से लगातार होने वाली खांसी.
- कब्जियत या मोटापा.
- प्रोस्टेट की गठान या मूत्र मार्ग में रुकावट.
- अनुवंशिक या जन्मजात.
- लिवर की गंभीर बीमारियां.
- प्रोटीन की कमी, कुपोषण.
- अत्यधिक धूम्रपान करना.
- ज्यादा भारी वजन उठाना.
- मांसपेशियों की कमजोरी.
- वृद्धावस्था या पैरालिसिस.
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