Wednesday, September 4, 2019

अनुच्छेद 35A हिंदी में क्या है? सरकार ने आर्टिकल 35 ए को मंजूरी दे दी है?

इन दिनों भारत से लेकर भारत-जापान तक और जापान से लेकर अमेरिका तक अनुच्छेद 35A को लेकर हलचल मची हुई है। अंत में यह अनुच्छेद 35A है? हम सभी के मन में यह सवाल देर सवेर उठता ही है। इस अनु ने 35 ए में ऐसा किया था? जिसकी वजह से सरकार इसे हटना चाहती थी। मूल रूप से भारत के हलसीसे कश्ती में धारा 370 लागू थी। जिसमें अनुच्छेद 35A भी जुड़ा हुआ था। जिसकी वजह से जम्ममूश्तिमीर राज्य की विधानसभा को कुछ विशेष शक्तियां और अधिकार हासिल थे। जिसको लेकर देश के प्रमुख राजनैतिक दल भारतीय जनता पार्टी लगातार कई वर्षों से सख्त बयान रवैया अपनाये हुए था।
यही कारण था कि जब देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री चुन कर सत् में आये तो अपने पहले 3 महीने के कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह ने अनुजेद 35 ए को हटा कर सरकारी हस्बैंड को पूरी दुनिया में खलबली मचाई। मचा दी।

अनुच्छेद 35A है? क्या सरकार ने इसे रोक दिया है?

अनुच्छेद 35A धारा 370 के खंड 1 में उलिलेखित एक बहुत महत्वपूर्ण खंड विनियमों था। जिसकी वजह से पूरे जम्ममूश्सीमीर को विशेष राज्य का दर्जा था। अनु अनुरक्षित 35 को 14 मई, सन 1954 में भारत सरकार की सहमति पर भारत के राष्पति की ओर से जोड़ा गया था। इस अनु पर आधारित के कारण जम्ममूश्तिमीर की विधानसभा को विशेष शक्तियां हासिल हुईं। जम्ममूसीशिर विधानसभा को यह अधिकार प्राप्त था। कि वह तय कर सके कि कौन जम्ममूश्सीर राज्य का नागरिक होगा। और कश्मीरी के स्थापितअय नागरिकों को विशेष अधिकार प्रदान करना और देश के अन्य नागरिकों पर जम्ममूश्सीमीर का नागरिक बनना ।

जम्मू कश्मीर को प्राप्त विशेष अधिकार –

अनुच्‍छेद 35 ए के चलते जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा यह तय कर सकती थी, कि राज्‍य का स्‍थायी नागरिक कौन होगा? और राज्‍य में किसे नौकरी दी जाएगी?

  • > ऐसे लोग जो राज्‍य के स्‍थायी नागरिक नहीं हैं। या फिर जिन्‍होंनें अपने राज्‍य की नागरिकता गवां दी है, उनकी चल व अचल संपत्ति को जब्‍त करना।
  • > जम्‍मू कश्‍मीर विधानसभा यह तय कर सकती थी, उनके राज्‍य में कौन बस सकता है और कौन नहीं।
  • > राज्‍य सरकार के द्धारा दी जाने वाली स्‍कॉलरशिप तथा अन्‍य योजनाओं का लाभ राज्‍य के स्‍थायी निवासियों के लिये सुनिश्चित किया जाना।
  • > जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य राज्‍य की हर व्‍यवस्‍था सिर्फ और सिर्फ राज्‍य केंद्रित थी। जिसका देश के अन्‍य नागरिकों को लाभ प्रदान नहीं किया जाता था। यदि अन्‍य लोगों को लाभ दिया जाता तो, यह जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य के विशेषाधिकार का हनन माना जा सकता था।
  • > जम्‍मू कश्‍मीर राज्‍य की कोई लड़की यदि देश के अन्‍य राज्‍य के व्‍यक्ति से शादी कर लेती थी, तो उसकी नागरिकता समाप्‍त हो जाती थी।
  • > इसके अतिरिक्‍त जम्‍मू कश्‍मीर में देश के अन्‍य राज्‍यों के निवासी किसी प्रकार की अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते थे।अनुच्‍छेद द्वारा लिखित 35 ए और जम्मू कश्मीर का इतिहास –

    जम्मू कश्मीर का इतिहास हिंदी में: सन 1947 में जब देश आज़ाद हुआ तब अंग्रेजों ने इसे 2 अवधियों में बांट कर भारत और हरियाणा में विभाजित किया था। जिसके बाद देश की रियासतों को यह खुली छूट दी गयी थी, कि वह जिस देश में चाहे उस देश में विलय कर सकता था। और यदि वह दोनों देशों में विलय नहीं करना चाहीती तो उन्हींने शवांतर देशों का दर्जा भी दिया जा सकता है। उस समय कश्ती के रियासत के महाराजा हरिसिंह थे। वह न तो कश्ती के आजसूतन में विलय के पक्ष में थे और न ही भारत के विलय के पक्ष में। इसके उलट वह कश्ती में एक शट्टर राशन बनाना चाहते थे। लेकिन मुसलमानों की नजर मुस्लिम बाहुल्यशिर पर शुरू हुई थी। यही कारण था कि भारतवासन ने कबालियों को भेज कर कश्ती पर आक्रमण कर दिया।

    कबालियों की फौजशिर के बड़े इलाके पर कब्ज़ा करती हुई चली गई थी। जिससे घबरा कर महाराजा हरिसिंह ने भारत से मदत से पूछा। जिसके फलस्वरुप भारत ने जम्ममूश्तिमीर के भारत में विलय का प्रस्ताव उन्हें दिया था। वहीं दूसरी ओर कश्ती के नेता शेख अब्बीदुल्ला भी कश्ती के भारत में विलय के पक्ष में थे। और इस मुहिम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए लगातार मुहिम चला रहे थे। महाराजा हरिसिंह पर एक तरफ नोआसथान का दबाव था तो दूसरी ओर शेख अब्सीदुल्ला का जो लगातार उनके लिए परेशानी खड़ी कर रहे थे।

    अनुच्‍छेद 35 ए धरा इन हिंदी क्या है –

    आखिरकार महाराजा हरिसिंह ने कश्ती के भारत में विलय के खिलौनेदे पर हसताक्षर कर दिया। जिससे पूरा जम्ममूसीरिर राज्य भारत का अभिन् अंग अंग बन गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पाकिस्तान सेना ने कश्मीरी के एक बड़े भूभाग पर कब्ज़ा कर लिया था। जिसे अब खाना पकाने के लिए अधिकृत किया गया है।

    भारत सिंगापुरसँ में कश्ती को लेकर जंग हुआ और युद्ध विराम होने पर दोनों देशों की सेनाएँ जिस भूभाग पर कायम थे, वहाँ थम गयीं। जिसके बाद नोत्तन के कब्ज़े वाले कश्ती की राजधानी मुजफ़्फ़र बनाई गयी। और भारत के पतन केसेशिर की राजधानी श्रीनगर (ग्रीष्मावधिक राजधानी) और जम्ममू (ग्रीष्मात्मक राजधानी) बनाई गई।

    सन 1952 में जम्ममूश्तिमीर के नेता शेख अब्दुल्ला और प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बीच एक समझौता हुआ। जिसके तहत पूरे जम्ममूसीशिर राज्य को एक विशेष दर्जा दिया जाना था। धारा 370 में अनुच्छेद 35A को भारत के राष्पति श्री राजेंद्र प्रसाद की मंजूरी के बाद इसे अपना लिया गया। जिसके तहत जम्ममूसीअमीर राज्य के नागरिकों को राज्य नागरिकता के साथ साथ भारतीय नागरिकता पर भी मुहर लगाई गई।

    धारा 370 के अनु अनुरक्षित 35 ए के तहत जम्ममूश्तिमीर विधानसभा को यह अधिकार सुरक्षित था, कि अनुगणित 35 ए को चाहे तो अपनी सहमति देकर हटवा सकता था। या बनाये रख सकते थे। लेकिन सन 2019 में देश के गृह मंत्री ने जम्ममूसीहिर राज्य की विधानसभा को स्पष्ट स्थिति में रखते हुए वहां की विधानसभा की शक्तियों को देश की संसद में समाहित कर दिया। अनुच्छेद 35A को हटाने की सिफारिश भारत के राष्पति श्री रामकोविंद से की। जिसे स्वीकार किया जाता है रात्रिपति रामकोविंद ने अनु खंडित 35 ए को अपनी मुहर लगाते हुए हटा दिया।

    आर्टिकल 35 ए के नुकसान –

    (1) आर्टिकल 35 ए को महिला विरोधी माना जाता था।
    (2) यह जम्ममूश्तिमीर के नागरिकों को भारत से विभाजित कर उन्हें देश के साथ जुड़ने में बाधा पैदा करने वाली बाधा थी।
    (3) भारत में रहने वाले मुसलमानों के साथ भी कश्ती के मुसलमानों के बीच रोटी बेटी के रिश्‍तों में कठिनाइयां आमपतनन करती थी।
    (4) भारत के लोग जम्ममूश्सीर में किसी भी अनुक्रम से भूमि खरीद नहीं सकते थे।
    अनु के अनुसार 35 ए के कुछ लाभ प्राप्त करने वाले लोगों के लिए उपयोगी माना जाता था –

    (1) धारा 370 के अनु अनुरक्षित 35 ए के तहत मिलने वाले विशेषाधिकारों के कारण नासिरियों को अपनी संबद्धता और कला को बचाये रखने में सहायता मिल रही थी।
    (2) अपने इस उद्देश्यों के कारण जम्ममू कश्ती में होने वाले विकास कार्यों में देश के अन्य राजों से काफी ऊपर हैं।
    अनुच्छेद 35A हटाने के लाभ –

    आर्टिकल 35 ए को अब पूरी तरह से बचाया जा चुका है। आने वाले समय में इसके कुछ लाभ भी दिखाई पड़ते हैं।

    (1) जर्ममूसीरिर राज्य में औद्योगिक निवेश में बढ़ोत्‍तरी होगी।
    (2) राज्य में विदेशी निवेश आने की संभावना बढ़ जाएगी।
    (3) देशी विदेशी कंपनियों के निवेश से राज्य में औद्धोगिक वातावरण बनेगा।
    (4) नासिर के लोगों को नए रोजगार का लाभ मिलेगा।
    (५) राज्य सिपाही वादी नेता अब विशेषाधिकारों से वंचित हो जाएंगें।
    (6) नासिर समसया के समाधान के बाद राज्य में पर्यटन में बढ़ोत्‍तरी दर्ज की जाएगी।
    दोस्ित्स अनुच्छेद 35A के बारे में हमने आपको विस्तार से जानकारी देने का प्रयास किया है। इसके इतिहास से लेकर इसके नफे नुकसान के बारे में आपको बताया गया है। यदि आपको हमारी यह पोस्त पसंद आई और आपके लिए उपयोगी साबित हुई है, तो कृपनीय कमेंट द्वारा हमें जरूर अवगत करवाएं। साथ ही अपने दोस्तों के साथ शेयर करें ।।

 

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